क्या कभी बिना किसी कारण आपका दिल अचानक उदास हो जाता है? हो सकता है कि आप किसी अच्छे पल में हों, लेकिन अचानक से मन में एक खालीपन या गहरी उदासी घर कर लेती है। इसका संबंध सिर्फ़ भावनाओं से नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक तीनों दृष्टियों से है। यह एक जटिल प्रक्रिया है जहाँ मन, शरीर और आत्मा आपस में जुड़े होते हैं।
इस लेख में, हम देखेंगे कि क़ुरआन (Qur’an), हदीस (Hadith), आधुनिक मनोविज्ञान (Psychology) और विज्ञान (Science) दुख और अचानक उदासी की इस भावना को कैसे समझाते हैं। हम इन सभी दृष्टिकोणों का विश्लेषण करेंगे ताकि आपको अपने मन को समझने का एक समग्र (holistic) नज़रिया मिल सके। यह लेख आपको अपने भीतर के इस रहस्य को जानने में मदद करेगा कि इंसान का मन अचानक दुखी क्यों हो जाता है।
क़ुरआन और हदीस में दुख का कारण
इस्लाम में, दुख या ग़म को जीवन का एक अपरिहार्य हिस्सा माना जाता है। यह केवल दुनियावी जीवन की सच्चाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक रहस्य और परीक्षा छिपी होती है। अल्लाह (सुब्हानहु व तआला) अपने बंदों को तकलीफ़ और आज़माइशों के ज़रिए परखते हैं।
अल्लाह दिलों की परीक्षा लेते हैं
पवित्र क़ुरआन स्पष्ट रूप से बताता है कि जीवन सिर्फ़ सुख-सुविधाओं का नाम नहीं है; इसमें परीक्षाएँ ज़रूर आएंगी। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं, “और हम तुम्हें थोड़ा सा ख़ौफ़, भूख, माल और जानों की कमी और फलों की पैदावार में कमी करके ज़रूर आज़माएंगे। और सब्र करने वालों को खुशखबरी सुना दीजिए।” (सूरह अल-बक़रह: 155)। इस आयत से पता चलता है कि दुख या किसी तरह का नुक़सान हमारे ईमान (Iman) की गहराई को मापने का एक ईश्वरीय ज़रिया है। जब बिना किसी स्पष्ट कारण के मन उदास होता है, तो यह भी एक प्रकार की ख़ामोश आज़माइश हो सकती है। इसका उद्देश्य यह है कि बंदा बेचैन न होकर अल्लाह की तरफ़ पलटे और उस पर अपना तवक्कुल (Tawakkul) यानी भरोसा मज़बूत करे।
नबी (स.अ.) दुख में क्या करते थे
मानव इतिहास में सबसे बेहतरीन शख़्सियत होने के बावजूद, पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने जीवन में कई दुखों और मुश्किल हालात का सामना किया। हदीस से मालूम होता है कि जब भी वह किसी वजह से दुखी या चिंतित होते थे, तो वह सबसे पहले सलाह (Salah)—यानी नमाज़—में खड़े हो जाते थे। हुज़ैफ़ा (र.अ.) से रिवायत है कि, “जब भी नबी (स.अ.) को कोई सख़्त मामला पेश आता था, तो वह नमाज़ में मशगूल हो जाते थे।” (सुनन अबी दाऊद, 1319)। यह हमें सिखाता है कि दुख के समय बेचैन न होकर, अल्लाह से संबंध जोड़ना—उससे दुआ (Dua) करना—सबसे ताक़तवर तरीक़ा है। यह न सिर्फ़ आध्यात्मिक सुकून देता है, बल्कि मन को शांत करने के लिए एक प्रभावी प्रक्रिया के रूप में भी काम करता है।
दुख ईमान को मज़बूत करता है
इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, दुनियावी जीवन के दुख-तकलीफ़ कभी बेकार नहीं जाते। हर तकलीफ़ और ग़म के बदले में आध्यात्मिक इनाम मिलता है। नबी (स.अ.) ने फ़रमाया है, “मुसलमानों को जो भी थकावट, बीमारी, चिंता, दुख, तकलीफ़ या ग़म पहुँचता है—यहाँ तक कि अगर उसे काँटा भी चुभता है, तो अल्लाह उसके बदले में उसके गुनाहों को माफ़ कर देता है।” (सहीह बुख़ारी, 5640)। इसलिए, अचानक आने वाले दुख का एक बड़ा फ़ायदा यह है कि यह आपके गुनाहों को मिटाने का एक मौक़ा होता है। यह मानसिकता (Mindset) दुख को केवल एक तकलीफ़ के रूप में देखने के बजाय, आध्यात्मिक विकास के एक चरण के रूप में देखने में मदद करती है।
अत्यधिक दुख से बचने के इस्लामी तरीके
इस्लाम अत्यधिक उदासी या निराशा को हतोत्साहित करता है। दुख का सकारात्मक तरीक़े से मुक़ाबला करने के लिए कुछ इस्लामी निर्देश दिए गए हैं। इनमें सबसे अहम हैं सब्र (Sabr)—यानी धैर्य रखना—और शुक्र (Shukr)—यानी अल्लाह की नेमतों के लिए कृतज्ञता व्यक्त करना। जब दुख अचानक आता है, तो इन तरीक़ों से उस पर क़ाबू पाया जा सकता है। इसके अलावा, अल्लाह के नामों या अस्मा उल हुस्ना (Asma ul Husna) का पाठ करना और ख़ास दुआएँ, जैसे नबी यूनुस की दुआ: “ला इलाहा इल्ला अन्ता सुब्हानका इन्नी कुन्तु मिनज़् ज़ालिमीन्” (तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू पाक है, बेशक मैं ज़ालिमों में से था)—पढ़ना मन को शांत करने में सहायक होता है।
मनोविज्ञान में अचानक दुख का कारण
आधुनिक मनोविज्ञान (Psychology) इंसान के मिज़ाज (Mood) और भावनाओं (Emotions) के अचानक बदलाव के पीछे कुछ गहरे संज्ञानात्मक (cognitive) और व्यवहारिक (behavioural) कारण ढूँढता है। कई बार दुख के ये कारण हमारे चेतन मन (Conscious Mind) से छिपे होते हैं।
मिज़ाज का तेज़ी से बदलना (Mood Swings)
(Mood Swings) (मिज़ाज का तेज़ी से बदलना) का मतलब है अचानक एक भावना से दूसरी भावना में तेज़ी से चले जाना। जब बिना किसी स्पष्ट बाहरी घटना के मन उदास होता है, तो यह अक्सर अंदरूनी, जैविक या मनोवैज्ञानिक कारकों का नतीजा होता है। यह हार्मोनल (Hormonal) उतार-चढ़ाव या हमारे मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर (Neurotransmitter) रसायन में बदलाव के कारण हो सकता है। कभी-कभी यह हमारे अनसुलझे अंदरूनी संघर्षों (Unresolved Internal Conflicts) या मानसिक थकान (Fatigue) का एक संकेत हो सकता है, जो अचानक सतह पर आ जाता है।
अत्यधिक सोचना और नकारात्मक विचार पैटर्न (Overthinking & Negative Thought Patterns)
मनोविज्ञान में जिसे (Rumination) (बार-बार सोचना या अत्यधिक विचार) कहा जाता है, वह अचानक दुख का एक मुख्य कारण है। यह वह प्रक्रिया है, जहाँ एक व्यक्ति लगातार नकारात्मक घटनाओं या विचारों के बारे में सोचता रहता है। यहाँ तक कि जब कोई कारण न हो, तब भी अंदरूनी नकारात्मक विचार पैटर्न (Thought Patterns) सक्रिय हो सकते हैं। ये पैटर्न समय के साथ मन में इस तरह जम जाते हैं कि मामूली सी बात या ट्रिगर (Trigger) के बिना भी यह मन को उदास कर सकते हैं। यह चक्र मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है।
बचपन की यादों का अनजाने में ट्रिगर होना (Childhood Memory Triggers)
हमारे पिछले अनुभव, ख़ासकर बचपन की घटनाएँ, हमारी भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को बहुत प्रभावित करती हैं। कई बार वर्तमान का कोई सूक्ष्म संकेत (subtle cue) —जैसे कोई गंध, आवाज़ या दृश्य—अनजाने में किसी अप्रिय बचपन की याद (unpleasant childhood memory) या आघात (trauma) को ट्रिगर कर देता है। यह ट्रिगरिंग इतनी तेज़ी से होती है कि हम सचेत रूप से कारण नहीं समझ पाते। अचानक मन ख़राब होना इस तरह की अचेतन याद (unconscious recall) का नतीजा हो सकता है, जहाँ भावना तो आ जाती है, लेकिन उसका स्रोत छिपा रहता है।
आत्म-सम्मान में कमी → उदासी (Low Self-Esteem → Sadness)
कम आत्म-सम्मान (Low Self-Esteem) या खुद के बारे में नकारात्मक धारणा अचानक दुख के लिए एक उपजाऊ ज़मीन तैयार करती है। जिस व्यक्ति का आत्म-सम्मान कम होता है, वह आसानी से अपनी आलोचना (criticize) करता है या ख़ुद को असफल देखता है। बाहरी घटना के बिना भी, अंदरूनी आत्म-बातचीत (internal self-talk) या मन के अंदर की नकारात्मक बातचीत अचानक आत्म-संदेह (self-doubt) बढ़ा सकती है, और इसके परिणामस्वरूप मन उदास हो जाता है। यह दुख बाहरी घटनाओं के बजाय अपनी अंदरूनी अपर्याप्तता की भावना (feelings of inadequacy) से अधिक प्रभावित होता है।
विज्ञान अनुसार मस्तिष्क व दुख
आधुनिक विज्ञान, ख़ासकर तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience), ने दिखाया है कि अचानक दुख का कारण केवल भावनाएँ या मनस्तत्व नहीं हैं; इसके साथ हमारे मस्तिष्क (Brain) की रसायन (Chemistry) और जैविक क्रियाएँ (Biological Functions) जुड़ी हुई हैं।
कम डोपामाइन → अचानक उदासी (Low Dopamine → Sudden Sadness)
डोपामाइन (Dopamine) हमारे मस्तिष्क का ‘अच्छा महसूस कराने वाला’ न्यूरोट्रांसमीटर (Neurotransmitter) है, जो आनंद (pleasure), प्रेरणा (motivation) और इनाम (reward) की भावना के लिए ज़िम्मेदार है। जब किसी कारण से डोपामाइन का स्तर (level) अचानक कम हो जाता है, तो हमारा मस्तिष्क वह आनंद और उत्साह महसूस नहीं कर पाता। यह अचानक मन ख़राब होने या आलस्य (lethargy) की भावना को जन्म दे सकता है। लंबे समय तक रहने वाला तनाव (stress), अनियमित नींद या ख़राब आहार (diet) डोपामाइन के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं।
सेरोटोनिन असंतुलन (Serotonin Imbalance)
सेरोटोनिन (Serotonin) एक और महत्वपूर्ण न्यूरोट्रांसमीटर है जो मिज़ाज (mood), नींद (sleep) और भूख (appetite) को नियंत्रित करता है। सेरोटोनिन में असंतुलन (Imbalance) नैदानिक अवसाद (Clinical Depression) या उदासी के मुख्य कारणों में से एक है। अगर अवसाद न भी हो, तब भी इस रसायन (chemical) का स्तर अचानक कम होने या इसमें किसी तरह की गड़बड़ी (dysfunction) होने पर, आप बिना किसी कारण के तीव्र दुख या चिंता (anxiety) महसूस कर सकते हैं। जीवनशैली कारक (Lifestyle Factors) इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं।
नींद में गड़बड़ी (Sleep Disruption)
पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद हमारे भावनात्मक नियंत्रण (emotional regulation) के लिए ज़रूरी है। जब नींद का चक्र (sleep cycle) ख़राब होता है या पुरानी नींद की कमी (chronic sleep deprivation) होती है, तो मस्तिष्क का वह हिस्सा जो भावनाओं को नियंत्रित करता है—यानी प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (prefrontal cortex)—उसकी कार्यक्षमता कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति चिड़चिड़ापन (irritability) और अचानक मिज़ाज बदलने (mood swing) का अनुभव करता है। रात में कुछ घंटे कम सोना भी अगले दिन आपकी भावनात्मक स्थिरता (emotional stability) को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
विटामिन डी की कमी (Vitamin D Deficiency)
कई अध्ययनों से पता चला है कि कुछ ख़ास विटामिन (Vitamin) की कमी मिज़ाज संबंधी विकारों (mood disorder) से जुड़ी है। ख़ासकर विटामिन डी की कमी (Vitamin D Deficiency) अचानक मन ख़राब होने या मौसमी मिज़ाज संबंधी विकारों (seasonal affective disorder) के जोखिम को बढ़ाती है। इसका कारण यह है कि मस्तिष्क के जिस हिस्से में मिज़ाज नियंत्रित होता है, वहाँ विटामिन डी रिसेप्टर्स (Vitamin D Receptors) मौजूद होते हैं। पर्याप्त सूरज की रोशनी न मिलने या आहार में विटामिन डी की कमी होने पर, यह न्यूरोट्रांसमीटर की कार्यक्षमता (function) को बाधित करता है, जिसके परिणामस्वरूप मन ख़राब हो सकता है।
रोज़मर्रा की आदतें जो दुख बढ़ाती हैं
हमारी रोज़मर्रा की कुछ साधारण आदतें (simple habits) या जीवनशैली के चुनाव (lifestyle choices) अनजाने में हमारे मानसिक स्वास्थ्य (mental health) को कमज़ोर कर देते हैं और अचानक दुख के लिए एक माहौल बनाते हैं।
सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग (Excess Social Media)
सोशल मीडिया (Social Media) की दुनिया में लगातार दूसरों की ‘आदर्श ज़िंदगी’ (perfect life) देखने से अपनी ज़िंदगी के साथ एक नकारात्मक तुलना (comparison) पैदा होती है। अत्यधिक स्क्रॉलिंग (scrolling) न केवल नींद के चक्र को ख़राब करती है, बल्कि यह मस्तिष्क पर एक तरह का संज्ञानात्मक भार (cognitive load) भी डालती है, जिससे अंततः मानसिक थकान (mental fatigue) होती है। यह थकान अचानक मन ख़राब होने का एक मुख्य कारण है, क्योंकि मस्तिष्क तब अपनी भावनात्मक स्थिरता को बनाए नहीं रख पाता।
अकेलापन (Loneliness)
इंसान एक सामाजिक प्राणी (social being) है। सामाजिक मेल-जोल (Social Interaction) हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ज़रूरी है। जब कोई व्यक्ति ख़ुद को अलग-थलग (isolate) कर लेता है और दूसरों से कम बात करता है, तो अकेलेपन की भावना (feelings of loneliness) तीव्र होती है। यह अलगाव (isolation) सीधे सेरोटोनिन और डोपामाइन के स्तर को प्रभावित करता है। नतीजतन, बाहर कोई बुरी घटना न होने पर भी, अंदरूनी अकेलापन अचानक गहरे दुख (deep sadness) के रूप में प्रकट हो सकता है।
जीवन में उद्देश्य की कमी (Lack of Purpose)
मनोविज्ञान में जिसे अस्तित्वगत दुख (existential sadness) कहा जाता है, वह जीवन में कोई अर्थ (meaning) या उद्देश्य (purpose) न खोज पाने की हताशा है। ख़ासकर, जब लोग अपने काम, संबंधों (relationship) या जीवन में कोई उच्च लक्ष्य (higher goal) नहीं देख पाते, तो एक गहरी, खालीपन की भावना आती है। यह भावना अचानक दुख के रूप में व्यक्त होती है, क्योंकि मस्तिष्क जीवन के अंतिम अर्थ (ultimate meaning) पर सवाल उठाता है। इस्लाम में इस खालीपन को भरने के लिए अल्लाह की इबादत और दूसरों के लिए काम करने पर ज़ोर दिया गया है।
तनाव और वित्तीय दबाव (Stress & Financial Pressure)
पुराना तनाव (Chronic Stress), चाहे वह काम का दबाव हो या वित्तीय संकट (Financial Crisis), हमारे मस्तिष्क के रसायन को लंबे समय तक के लिए बदल देता है। तनाव के समय हमारा शरीर कॉर्टिसोल (Cortisol) नामक एक तनाव हार्मोन (Stress Hormone) पैदा करता है। इस हार्मोन का स्तर बढ़ जाने पर, यह हमारे मिज़ाज को नियंत्रित करने की क्षमता को कमज़ोर कर देता है। इसके परिणामस्वरूप, मामूली ट्रिगर के बिना भी या अचानक से गहरा दुख या चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है।
इस्लामी + वैज्ञानिक तरीके दुख दूर करने के
जब दुख अचानक आता है, तो उससे निपटने के लिए इस्लाम और आधुनिक विज्ञान—दोनों में ही कुछ प्रमाणित तरीक़े (methods) मौजूद हैं। ये तरीक़े मन और शरीर का संतुलन (Balance) वापस लाने में मदद करते हैं।
सलात और दुआ — आध्यात्मिक राहत (Salah & Dua — Spiritual Relief)
इस्लामी तरीक़े के अनुसार, दुख दूर करने का सबसे ताक़तवर उपाय अल्लाह से दोबारा जुड़ना है। सलाह (Salah)—यानी नमाज़—केवल एक धार्मिक क्रिया (ritual) नहीं है, यह मन के लिए एक तरह का ध्यान (Meditation) है। यह शरीर और मन को एक केंद्रित अवस्था (focused state) में लाती है। क़ुरआन का पाठ (Quran Tilaawat) और अल्लाह से दुआ (Dua) करना मन का आध्यात्मिक और भावनात्मक उपचार (emotional healing) करता है। क़ुरआन पाठ के दौरान मस्तिष्क में जो तरंगें (waves) उत्पन्न होती हैं, वह शांत अवस्था (calm state) जैसी होती हैं, जो तनाव (stress) को कम करने में मदद करती हैं।
साँस लेना और ध्यान (Breathing & Meditation)
गहरी साँस लेने (Deep Breathing) की प्रक्रिया और सचेतनता (Mindfulness) या ध्यान (Meditation) वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ऐसे तरीक़े हैं, जो अचानक दुख या चिंता (Anxiety) को कम कर सकते हैं। जब आप धीरे-धीरे गहरी साँस लेते हैं, तो यह आपके पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic Nervous System) को सक्रिय करता है, जो शरीर को ‘आराम और पाचन’ (rest and digest) की स्थिति में लाता है। यह आपकी हृदय गति (heart rate) को कम करता है और कॉर्टिसोल हार्मोन का उत्पादन बंद करता है, जिससे आपको तुरंत शांति (calmness) महसूस होती है।
सकारात्मक दैनिक दिनचर्या (Positive Daily Routine)
आपका दिन कैसे शुरू होता है, इस पर आपका मिज़ाज बहुत हद तक निर्भर करता है। एक सकारात्मक सुबह की दिनचर्या (Positive Morning Routine)—जैसे सूरज उगने के समय 10 मिनट बाहर रहना, हल्का व्यायाम करना, या क़ुरआन या कोई अच्छी किताब पढ़ना—आपके मस्तिष्क के लिए एक सकारात्मक आधार (positive foundation) तैयार करती है। ये आदतें डोपामाइन और सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाने में मदद करती हैं और अचानक दुख आने की प्रवृत्ति को कम करती हैं।
व्यायाम और सूरज की रोशनी (Exercise & Sunlight)
शारीरिक व्यायाम (Physical Exercise) और सूरज की रोशनी (Sun Exposure)—दोनों ही तुरंत मिज़ाज बेहतर करने वाले (instant mood booster) हैं। सिर्फ़ 10 मिनट की तेज़ चाल या हल्का व्यायाम आपके मस्तिष्क में एंडोर्फिन (Endorphins)—’प्राकृतिक दर्द निवारक’ (natural pain killers)—जारी करता है, जो मिज़ाज को बेहतर बनाता है। साथ ही, सूरज की रोशनी विटामिन डी का उत्पादन बढ़ाती है और मस्तिष्क में सेरोटोनिन के स्तर को सामान्य रखने में मदद करती है। दिन में एक बार कम से कम 10-15 मिनट के लिए सूरज की रोशनी के संपर्क में आना चाहिए।
निष्कर्ष
मन (Psychology), शरीर (Science) और रूह (Soul) तीनों मिलकर हमारी भावनाओं का निर्माण करते हैं। जब इन तीनों में से किसी एक का संतुलन (Balance) बिगड़ता है, तो उसका लक्षण दुख या उदासी के रूप में प्रकट होता है। इस्लाम, विज्ञान और मनोविज्ञान—तीनों पक्ष यह मानते हैं कि दुख एक सामान्य आंतरिक संकेत (internal signal) है। यह हमें रुकने, अपना ख़्याल रखने और अल्लाह की तरफ़ पलटने का एक ईश्वरीय बुलावा (divine call) है।
आपके अनुसार अचानक दुख का कारण क्या है? हमें टिप्पणी (Comment) में बताएँ।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
अचानक मन ख़राब होना क्या अवसाद (Depression) का लक्षण है?
अचानक मन ख़राब होना हमेशा अवसाद (Depression) नहीं होता। यह तनाव, नींद की कमी या हार्मोनल बदलाव के कारण हो सकता है। हालाँकि, यदि यह दुख दो सप्ताह से अधिक समय तक रहे और आपके सामान्य जीवन को बाधित करे, तो एक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ (Mental Health Professional) से सलाह लेनी चाहिए।
क्या इस्लाम दुख कम करने के तरीक़े बताता है?
हाँ, ज़रूर। इस्लाम सब्र (धैर्य), शुक्र (कृतज्ञता), सलाह (नमाज़) और अल्लाह से दुआ पर ज़ोर देता है। ये अभ्यास (practices) मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति देते हैं और दुख के समय मन को शांत रखने में मदद करते हैं।
किस विटामिन की कमी से मिज़ाज ख़राब होता है?
मुख्य रूप से विटामिन डी (Vitamin D) की कमी मिज़ाज संबंधी विकारों से जुड़ी है। इसके अलावा, बी-विटामिन (B-Vitamins), ख़ासकर बी12 (B12), और ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty Acids) की कमी से भी मिज़ाज ख़राब हो सकता है।
अत्यधिक सोचने (Overthinking) से क्या दुख बढ़ता है?
हाँ, मनोविज्ञान में इसे (Rumination) (बार-बार सोचना) कहते हैं। यह नकारात्मक विचारों का एक चक्र बनाता है, जो मस्तिष्क के न्यूरोकैमिकल संतुलन (Neurochemical Balance) को बिगाड़ता है और दुख या चिंता को बढ़ाता है।
क्या नींद की कमी मूड स्विंग (Mood Swing) पैदा करती है?
बिल्कुल। नींद की कमी मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex) की कार्यक्षमता को कम कर देती है, जो भावनात्मक नियंत्रण (Emotional Regulation) के लिए ज़िम्मेदार है। इसके परिणामस्वरूप, छोटी बातों पर भी चिड़चिड़ापन और अचानक मिज़ाज में बदलाव (Mood Swing) देखा जाता है।
क्या दुआ या क़ुरआन पढ़ने से मानसिक शांति मिलती है?
हाँ, यह इस्लामी और वैज्ञानिक रूप से सच है। क़ुरआन का पाठ (Quran Recitation) एक तरह की ध्यान की अवस्था (Meditative State) बनाता है, जो तनाव हार्मोन का स्तर कम करता है। अल्लाह से दुआ करना एक सकारात्मक सामना प्रक्रिया (Positive Coping Mechanism) है, जो मन में उम्मीद और राहत भरती है।
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